बुधवार, 16 अप्रैल 2014

जुम्मन की स्त्री

आज युग
विज्ञान और प्रोद्योगिकी में
बहुत आगे बढ़ गया है

अन्तरिक्ष में स्टेशन बन गए है
जहाँ वैज्ञानिक अन्य ग्रहों पर
जीवन  की खोज कर रहे हैं

इंटरनेट और मोबाइल ने
दूर संचार के क्षेत्र में क्रांति ला दी है
पूरी दुनिया एक साथ जुड़ गयी है

मंगल ग्रह पर पानी को खोजा जा रहा है
कृत्रिम बादलो से बरसात की जा रही है
समुद्र से तेल निकाला जा रहा है

द्रुतगामी वायुयान बन गए है
जिससे कम समय में एक देश से दुसरे देश
द्रुतगति से आना जाना संभव हो गया है

लेकिन इन सबसे जुम्मन की स्त्री को क्या लेना-देना
उसे तो रोज सड़क के किनारे बैठ कर
भरी दुपहरी में पत्थर ही तोड़ना है

और ठेकेदार की बुरी नजरों से बचते हुए
अपने बच्चे को दूध पिलाने के बहाने
किसी पेड़ की छांव में सुख ढुंढना है।














































            

शहीद की पीड़ा


मै इस देश की
सीमा पर तैनात एक 
अदना सा सिपाही हूँ

देश की
रक्षा करते हुए
आज शहीद हो गया हूँ   

मैंने अभी तक
जीवन के पुरे नहीं
किये हैं तीस बसंत 

पच्चीस बर्ष
की उम्र मे ही जीवन 
का हो गया अंत

मै जानता हूँ
मेरे  लिए कोई
शोक सभा नहीं होगी

कोई मौन
नहीं रखा जाएगा
कोई झंडा नहीं झुकेगा 

यहाँ तक कि
मेरे गाँव में मेरा कोई
स्मारक भी नहीं बनेगा

एक सिपाही की
मौत से किसी को क्या
फर्क पडेगा ?

हाँ ! फर्क पडेगा
मेरे बच्चों को जिनका
मै बाप था

मेरी पत्नी को
जिसका मै पति था 
मां को जिसका मै बेटा था

और .....कल के
अखबार के कोने मे 
एक छोटी सी खबर छपेगी

कश्मीर घाटी में
आतंकियों से मुकाबला करते    
तीन सिपाही शहीद। 




































झमाझम बारिश में


                                    करलो मन की बात 
                                       झमाझम बारिश में   

     कागज़ की एक़ नाव बनाओ       
छोडो     उसको      पानी  मे 
भीगने    का     मजा   लेने 
 कूदो    छपाक   से पानी में  

                                           करलो मन की बात 
                                            झमाझम बारिश में


   आई   पुरवाई  मदमाती  
मिल कर भिगो पानी में
 सब   मिल   कर  गाओ
 मल्हार  भीगते पानी  में

                                          करलो मन की बात  
                                          झमाझम बारिश में 


 ठेले  पर  भुट्टे भुनवा कर 
 खाओ   बरसते   पानी में
  रैनी डे   की  छुट्टी    होगी 
   नाचो     कूदो   पानी   में 

                                      करलो मन की बात
                                       झमाझम बारिश में

गरमा-गरम चाय पकौड़ी
मिल कर  खाओ पानी में
  मम्मी   जब  डांट  लगाए
 मत  भिगो   तुम पानी में

                                         करलो मन की बात
                                           झमाझम बारिश में

 गीली मिटटी घर बनाओ 
भीगो  बरसते   पानी में,
सर्दी लगे   नाक बहे तब 
 खाओ हलवा बिस्तर में
                                         करलो मन की बात
                                          झमाझम बारिश में।












                               

































































   करलो मन की बात 
                                       झमाझम बारिश में 

     कागज़ की नाव बनाओ       
छोडो  उसको  पानी  मे 
भीगने  का  मजा  लेने 
 कूदो छपाक से पानी में

                                           करलो मन की बात 
                                            झमाझम बारिश में


   आई   पुरवाई  मदमाती
मिल कर भिगो पानी में
 सब   मिल   कर  गाओ
 मल्हार  भीगते पानी  में

                                          करलो मन की बात  
                                          झमाझम बारिश में 
 ठेले  पर  भुट्टे भुनवा कर 
 खाओ  बरसते  पानी में
  रैनी डे  की  छुट्टी    होगी 
   नाचो    कूदो  पानी   में 

                                      करलो मन की बात
                                       झमाझम बारिश में

गरमा-गरम चाय पकौड़ी
मिल कर  खाओ पानी में
  मम्मी जब  डांट  लगाए
 मत  भिगो तुम पानी में

                                         करलो मन की बात
                                           झमाझम बारिश में

 गीली मिटटी घर बनाओ 
भीगो  बरसते   पानी में,
सर्दी लगे   नाक बहे तब 
 खाओ हलवा बिस्तर में।
                                         करलो मन की बात
                                          झमाझम बारिश में।























पूजा राणा


केवल नाम ही नहीं है
 तुम्हारा पूजा
जग में कोई भी नहीं है
तुम जैसा दूजा

तुम चमको जहाँ में
इस तरह कि 
तुम्हारा नाम पूजा
जाए हर जगह

तुम खिलो पूनम के
सपनों की तरह
खुशबुओं में नहाओं 
फूलों की तरह

कल्पना चावला बन
आसमान में ऊड़ो
झाँसी की रानी बन
हुँकार भरो

मदर टेरेसा बन
समाज सेवा करो
दुर्गा बन इतिहास में
नाम अमर करो

फैले तुम्हारा यश
नील गगन सा
तुम्हारी कीर्ति  का
विस्तार हो ब्रह्मांड सा। 
                                   



केवल नाम ही नहीं है
 तुम्हारा पूजा
जग में कोई भी नहीं है
तुम जैसा दूजा

तुम चमको जहाँ में
इस तरह कि 
तुम्हारा नाम पूजा
जाए हर जगह

तुम खिलो पूनम के
सपनों की तरह
खुशबुओं में नहाओं 
फूलों की तरह

कल्पना चावला बन
आसमान में ऊड़ो
झाँसी की रानी बन
हुँकार भरो

मदर टेरेसा बन
समाज सेवा करो
दुर्गा बन इतिहास में
नाम अमर करो

फैले तुम्हारा यश
नील गगन सा
तुम्हारी कीर्ति  का
विस्तार हो ब्रह्मांड सा। 



























































बचपन लौट आया


चाँद सितारों
ने देखा
अप्सराओं  ने
भी देखा

एक नन्ही परी
  धरती पर उतर आई
मेरे घर की
चौखट जगमगाई

खुशियों की
बहार छाई
परी आयशा बन 
घर में आई

आँखों में तारे
भर लाई
घर में सबका
बचपन लाई

हम लाये 
 उसके लिए खिलौना
वो बन गयी
 हम सब का खिलौना।  

































प्रभु अगर ऐसा हो जाता

प्रभु अगर ऐसा  हो जाता
मै  छोटा पक्षी बन जाता
आसमान में ऊँचे उड़ कर
कलाबाजियाँ मै भी खाता


पेड़ो पर मीठे फल खाता
झरनों का मै पानी पीता
स्कूल से हो जाती छुट्टी
होमवर्क नहीं करना पड़ता


खेतो-खलिहानों में जाता
नदी-नालों के ऊपर उड़ता
उड़ कर देश-प्रदेश देखता
नानी के घर भी उड़ जाता


उड़ने पर कोई रोक न होती
आसमान मेरा घर होता
जब तक मर्जी उड़ता रहता
साँझ ढले घर पर आ जाता


मीठी वाणी बोल-बोल कर
सबके मन को मै मोह लेता
बच्चों को मै दोस्त बना कर
रोज उन्हें मीठे फल देता।







































मेरी प्यारी दादी जी


अमेरिका से मुझसे मिलने
आई मेरी दादी जी 
सुन्दर कपडे और खिलौने 
लायी मेरी प्यारी दादी जी

बड़े प्यार से मुझे सुलाये 
मेरी प्यारी दादी जी 
लौरी गाये गीत सुनाये 
मेरी प्यारी दादी जी

सेव-पपीता मुझे खिलाये
मेरी प्यारी दादी जी 
ताजे फल का जूस पिलाये
मेरी प्यारी दादी जी 

लुका-छिपी खेल खिलाये
मेरी प्यारी दादी जी
मैं  रूठूँ तो मुझे मनायें 
मेरी प्यारी दादी जी। 


(आयशा १४ महीने की  हो गयी, तब उसके दादी जी ने उसे देखा है। दादी जी कहती है कि उनका बचपन लौट आया है। आयशा भी अपनी दादी जी गोदी में  खूब खेलती है।)  




सबको अच्छा लगता चाँद

बच्चों का यह चन्दा मामा
नील  गगन से निचे आता
लोरी गाकर  उन्हें सुलाता
तारों  को संग लाता  चाँद
 सबको अच्छा लगता चाँद

अमीर-गरीब  का भेद नहीं
छुआ- छुत  की  बात नहीं
एकनजर और एकभाव से
   सब  के घर  में आता चाँद
सबको अच्छा लगता चाँद

रोज चांदनी के संग आता
अंधियारे में  राह दिखाता
  लेकर  बारात सितारों की  
   पूनम को बनठन आता चाँद     
 सबको अच्छा लगता चाँद

ईद मनाओ या करवा चौथ
करे  चाँद  का  दर्शन लोग
गीता-कुरान  का भेद नहीं
सब के मन को भाता चाँद
  सब को अच्छा लगता चाँद।

















































एक नन्ही परी


एक नन्ही परी सी 
गुलाब की कली सी
अपनी भाषा में कुछ बोलती 
हँसती मुस्कराती मधु घोलती

एक नन्ही परी  सी
मिसरी की डली सी
लघु पांवों पर खडी होती
पकड़ खाट थोड़ी  चलती

एक नन्ही परी सी
प्यारी राजदुलारी सी 
दिन में किलकारियां भरती
गोदी में अठखेलियाँ करती 
   
एक नहीं परी सी
हँसती सूरजमुखी सी
  अति कोमल नाजुक सी
  भोली-भाली  गुड़िया सी

एक नन्ही परी सी
 प्यारी छुई-मुई सी
बाहर जाने को खूब मचलती
 जाकर बाहर खुश  हो जाती 

एक नन्ही परी सी
  कोई नहीं आयशा सी।  
























































































































































  

आयशा उठो -आँखे खोलो


आयशा !
उठो आँखे खोलो
देखो कौन-कौन
आया है
सूरज तुमको
उठाने के लिए
   खिड़की से झांक रहा है

किरणें तुमको
उठाने के लिए
   पायल खनका रही है

चिड़ियाँ तुमको
उठाने के लिए
मधुर गीत गा रही हैं 

गुलमोहर तुम्हारे
कदमो के लिए
सुर्ख फुल बिखेर रहा है

मोगरा तुम्हारी
साँसों में बस जाने
के लिए महक रहा है

सभी कायनात  
तुम्हारी आँखे खुलने  
के इन्तजार में है

आयशा उठो
अब अपनी
आँखे खोलो।